Thursday, January 17, 2019

Republic Day Essay in Hindi 2019: गणतंत्र दिवस पर निबंध (100, 150, 200 & 250 Word Essay in Hindi)

गणतंत्र दिवस पर निबंध | Republic Day Essay in Hindi: Republic Day is an important day for the people of India, so we are celebrating it every year on 26 January 1950. Let us, through this essay, make our children aware of the history associated with it. These are written in very easy words, which children will be able to understand easily, and it will be available to the marriages with different word boundaries on the Internet.

India received independence on August 15, 1947. We had to fight a lot for freedom and many people sacrificed their lives. Thousands of people went to jail during the freedom struggle and then our leaders had decided to establish a Republican government. Some great leaders and educated people made a new constitution of India and the Constitution was implemented from January 26, 1950. India became a republic, it was the day written in golden letters in the history of our country.


भारतीय गणतंत्र दिवस पर निबंध (रिपब्लिक डे एस्से)

You can get here some Republic Day Essay in the Hindi language for students in words limit of 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

Republic Day Essay in Hindi | गणतंत्र दिवस पर निबंध

हर साल भारत में जो दो-चार राष्ट्रीय पर्व मनाए जाते हैं. 26 जनवरी के दिन मनाया जाने वाला गणतंत्र-दिवस उन सभी में सबसे प्रमुख एवं महत्वपूर्ण पर्व या उत्सव है। हमारा देश 15 अगस्त, सन् 1947 के दिन लगभग दो शताब्दी तक परतंत्रता की यातनाएँ भोगते रहने और अनेक प्रकार के त्याग और बलिदान करने के बाद कहीं जाकर भारत देश स्वतंत्र हुआ था.

परतंत्र भारत में विदेशी, ब्रिटिश शासन द्वारा अपने स्वार्थ साधने के लिए बनाया गया संविधान ही चलाया करते थे । उस शोषक और प्रर्पोड्‌क मनोवृत्ति वाले संबिधान के बल पर ही अंग्रेज यहाँ राज-काज चलाया करते थे.

अत: स्वतंत्रता-प्राप्ति के तत्काल बाद इस कटु तथ्य का अनुभव किया गया, साथ ही यह निर्णय भी किया गया कि भारत जैसे साँस्कृतिक द्रष्टी से बहु आयामी देश में ऐसा संविधान लागू होना चाहिए कि जो सामूहिक स्तर पर सभी का हित-साधन कर सके.

भारत की सास्कृतिक गरिमा और अनेकता के साथ-साथ एकता के तत्त्वों को भी उजागर कर सके । विशेषज्ञों की गठित समिति द्वारा बडे परिश्रम से स्वतंत्र भारत का अपना और नया संविधान तैयार किया गया.

वह संविधान जो वास्तव में 26 जनवरी के दिन गणतंत्र दिवस जैसा पवन राष्ट्रीय पर्व मनाने का मूल कारण है. स्वतंत्र भारत का अपना संविधान 26 जनवरी, सन् 1950 के दिन लागू किया गया. इस दिन से संविधान की प्रमुख धाराओं के अनुसार भारत को एक सर्वसत्ता-सम्पन्न गणराज्य और गणतंत्र घोषित किया गया. इसी गणतंत्री संविधान के अनुसार यह भी इसी दिन घोषित किया गया कि देश की सर्वोच्च सत्ता जिस व्यक्ति के अधीन रहेगी, उसे राष्ट्रपति कहा जाएगा.

भारत का पहला राष्ट्रपति कौन होगा, इसकी घोषणा भी इसी तारीख को की गई। मुख्यत: इन्हीं कारणों से सारा भारत हर वर्ष छब्बीस जनवरी का दिन ‘गणतंत्र-दिवस’ के रूप में एक महान् राष्ट्रीय पर्व मानकर बड़ी सजधज के साथ पूर्ण उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है.

गणतंत्र-दिवस का राष्ट्रीय पर्व भारत तथा भारत के बाहर प्रत्येक उस स्थान पर मनाया जाता है जहा पर भारतीय मूल का एक भी व्यक्ति निवास कर रहा है; पर एक तो दिल्ली के राजधानी होने और दूसरे राष्ट्रपति का निवास यहीं पर होने के कारण केन्द्रीय स्तर पर यह पर्व यहीं नई दिल्ली में ही मनाया जाता है.

इसकी तैयारी एक महीनें पहले से आरम्भ हो जाया करती है| यहाँ पर प्रत्येक लोक सास्कृतिक दल बनाकर अपने-अपने प्रान्त की सम्पूर्णता प्रकट करने वाली झांकियों को बनाने लग जाया करते हैं, नृत्य-संगीत आदि लोक-कलाओं के प्रदर्शन की तैयारियों में भी जुट जाया करते हैं। दिल्ली के छावनी क्षेत्र में भी सैनिकों, एन०सी०सी० आदि के द्वारा परेड के पूर्वाभ्यासों के कारण विशेष हलचल सुनाई देने लग जाती है.

समाचार पत्र 26 january की तैयारियो का जायजा और उसको प्रस्तुत करने का काम पहले से ही करने लगते हैं. अपनी जानकारियों के आधार पर यह भी बता देते हैं कि इस बार गणतंत्र परेड के अवसर पर राष्ट्रपति के साथ किस देश का व्यक्ति मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेगा.

26 जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री तीनों सेनाओं के सेनापतियों के साथ मिलकर पहले इण्डिया गेट पर जल रही अमर जवान ज्योति पर पहुँचकर अज्ञात-अमर शहीदों को सलामी- श्रद्धांजलि देते हैं, फिर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए राष्ट्रपति भवन के सामने स्थित विजय चौक पर आ जाते हैं। तब तक अन्य गण्य मान्य अतिथि, दर्शक आदि भी आ चुके होते हैं.

इसके बाद आगमन होता है विदेशी अतिथि के साथ राष्ट्रपति का, जिनका बिगुल आदि बजाकर स्वागत् किया जाता है| कई बार इस अवसर पर राष्ट्रपति कुछ विशिष्ट अलंकरण र्भो प्रदान किया करते हैं | इसके ध्वजारोहण और फिर सेना के तीनों अंगों, इक्कीस तोपों की सलामी दी जाती है.

अन्य सैनिक-अर्द्धसैनिक बल भी एक-एक करके सलामी देते हुए मंच के सामने से गुजर जाते हैं। फिर आधुनिकतम शस्त्रों का प्रदर्शन, तरह-तरह के बैण्ड, प्रान्तों की झाँकियाँ और उनके साथ लोक-कलाकारों के प्रदर्शन, स्कूलों की छात्र-छात्राओं द्वारा रंग-बिरंगे प्रदर्शन आदि का कार्यक्रम दोपहर तक चलता रहता है.

दोपहर तक परेड प्रदर्शन करने वाले सभी जन जब मार्च करते लाल किले पर पहुँच जाया करते हैं, तब मुरप्न पर्व थमता है । फिर दो दिन बाद जब परेड का राष्ट्रपति भवन तक प्रत्यावर्तन हो जाया करता है, तभी गणतंत्र पर्व का समापन माना जाता है| इन दिनों सायंकाल विजय चौक के लीन में सैनिक बैण्डों का सुन्दर संगीतमय कार्यक्रम भी प्रस्तुत करने की परम्परा है.

रात के समय राष्ट्रपति भवन, संसद भवन तथा अन्य सभी प्रमुख सरकारी भवन विद्युत्यकाश की अनोखी छटा का प्रदर्शन किया करते हैं. रंगारंग आतिशबाजी भी चलाई जाती है. इस प्रकार सभी तरह के आयोजन भारतीय गणतंत्र की गरिमा और गौरव के अनुरूप ही हुआ करते हैं. उन्हें निहार कर प्रत्येक भारतीय का सीना गर्व से भरकर कहने को बाध्य हो उठा करता है. अमर रहे भारतीय गणतंत्र ।
Read Here:- Happy Republic Day Essay 2019 in English 

गणतंत्र दिवस पर निबंध (100 शब्द) 

26 जनवरी 1950, पूरा भारतवर्ष हर साल इस दिन को बड़े धूमधाम से मनाता है क्योंकि इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। 26 जनवरी 1950 के इस खास दिन पर भारतीय संविधान ने शासकीय दस्तावेजों के रुप में भारत सरकार के 1935 के अधिनियम का स्थान ले लिया। भारत सरकार द्वारा इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। भारत के लोग इस महान दिन को अपने तरीके से मनाते है। इस दिन पर भारत के राष्ट्रपति के समक्ष नई दिल्ली के राजपथ (इंडिया गेट ) पर परेड का आयोजन होता है।

गणतंत्र दिवस पर निबंध (150 शब्द)

जब पहली बार भारत को अपना संविधान मिला तब से भारत हर साल 26 जनवरी 1950 से गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहा है भारतीय इतिहास में गणतंत्र दिवस का बहुत महत्व है क्योंकि ये हमें भारतीय स्वतंत्रता से जुड़े हर-एक संघर्ष के बारे में बताता है। भारत की पूरी आजादी (पूर्णं स्वराज) की प्राप्ति के लिये लाहौर में रावी नदी के किनारे 1930 में इसी दिन भारत की आजादी के लिये लड़ने वाले लोगों ने प्रतिज्ञा की थी। जो 15 अगस्त 1947 को साकार हुआ।
26 जनवरी 1950 को, हमारा देश भारत संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, और लोकतांत्रिक, गणराज्य के रुप में घोषित हुआ अर्थात भारत पर खुद का राज था उस पर कोई बाहरी शक्ति शासन नहीं करेगी। इस घोषणा के साथ ही दिल्ली के राजपथ पर भारत के राष्ट्रपति के द्वारा झंडा फहराया गया साथ ही परेड तथा राष्ट्रगान से पूरे भारत में जश्न का माहौल शुरु हो गया।

गणतंत्र दिवस पर निबंध (200 शब्द)

गणतंत्र दिवस को 26 जनवरी भी कहा जाता है जो कि हर साल मनाया जाता है ये दिन हर भारतीयों के लिये मायने रखता है क्योंकि इसी दिन भारत को एक गणतांत्रिक देश घोषित किया गया था साथ ही आजादी के लंबे संघर्ष के बाद भारतीयों को अपनी कानूनी किताब ‘संविधान’ की प्राप्ति हुई थी। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ और इसके ढ़ाई साल बाद ये लोकतांत्रिक गणराज्य के रुप में स्थापित हुआ।
आजादी के बाद एक ड्राफ्टिंग कमेटी को 28 अगस्त 1947 की मीटिंग में भारत के स्थायी संविधान का प्रारुप तैयार करने को कहा गया। 4 नवंबर 1947 को डॉ बी.आर.अंबेडकर की अध्यक्षता में भारतीय संविधान के प्रारुप को सदन में रखा गया। इसे पूरी तरह तैयार होने में लगभग तीन साल का समय लगा और आखिरकार इंतजार की घड़ी 26 जनवरी 1950 को इसको लागू होने के साथ ही खत्म हुई। साथ ही पूर्णं स्वराज की प्रतिज्ञा का भी सम्मान हुआ।
भारत में गणतंत्र दिवस का दिन राष्ट्रीय अवकाश के रुप में मनाया जाता है जब इस महान दिन का उत्सव लोग अपने-अपने तरीके से मनाते है, जैसे- समाचार देखकर, स्कूल में भाषण के द्वारा या भारत की आजादी से संबंधित किसी प्रतियोगिता में भाग लेकर आदि। इस दिन भारतीय सरकार द्वारा नई दिल्ली के राजपथ पर बहुत बड़ा कार्यक्रम रखा जाता है, जहाँ झंडारोहड़ और राष्ट्रगान के बाद भारत के राष्ट्रपति के समक्ष इंडिया गेट पर भारतीय सेना द्वारा परेड किया जाता है।

गणतंत्र दिवस पर निबंध 4 (250 शब्द)

हर साल 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस मनाता है क्योंकि इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। इसे हम सभी राष्ट्रीय पर्व के रुप में मनाते है और इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। इसके अलावा गाँधी जयंती और स्वतंत्रता दिवस को भी राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। भारतीय संसद में भारत के संविधान के लागू होते ही 26 जनवरी 1950 को हमारा देश पूरी तरह से को लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया।
इस महान दिन पर भारतीय सेना द्वारा भव्य परेड किया जाता है जो सामान्यत: विजय चौक से शुरु होकर इंडिया गेट पर खत्म होता है। इस दौरान तीनों भारतीय सेनाओं (थल, जल, और नभ) द्वारा राष्ट्रपति को सलामी दी जाती है साथ ही सेना द्वारा अत्याधुनिक हथियारों और टैंकों का प्रदर्शन भी किया जाता है जो हमारे राष्ट्रीय शक्ति का प्रतीक है। आर्मी परेड के बाद देश के सभी राज्यों द्वारा झाँकियों के माध्यम से अपने संस्कृति और परंपरा की प्रस्तुति की जाती है। इसके बाद, भारतीय वायु सेना द्वारा हमारे राष्ट्रीय झंडे के रंगों (केसरिया, सफेद, और हरा) की तरह आसमान से फूलों की बारिश की जाती है।
इस दिन स्कूल-कॉलेजों में भी विद्यार्थी परेड, खेल, नाटक, भाषण, नृत्य, गायन, निबंध लेखन, सामाजिक अभियानों में मदद के द्वारा, स्वतंत्रता सेनानियों के किरदार निभा कर आदि बहुत सारी क्रियाओं द्वारा इस उत्सव को मनाते है। इस दिन हर भारतीय को अपने देश को शांतिपूर्णं और विकसित बनाने के लिये प्रतिज्ञा करनी चाहिये। और अंत में हर विद्यार्थी मिठाई और नमकीन लेकर खुशी-खुशी अपने घर को रवाना हो जाता है।

गणतंत्र दिवस पर निबंध (300 शब्द) 

भारत में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रुप में जाना जाता है जो कि भारत के लोगों द्वारा बेहद खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य होने के महत्व को सम्मान देने के लिये इसको मनाया जाता है जो 26 जनवरी 1950 में भारत के संविधान के लागू होने के बाद घोषित किया गया था। इसे ब्रिटीश शासन से भारत की ऐतिहासिक आजादी को याद करने के लिये मनाया जाता है। इस दिन को भारत सरकार द्वारा पूरे देश में राजपत्रित अवकाश के रुप में घोषित किया गया है। इसे पूरे भारत वर्ष में विद्यार्थीयों द्वारा स्कूल, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में मनाया जाता है।
भारत सरकार हर साल राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित करती है जिसमें इंडिया गेट पर खास परेड का आयोजन होता है। अल-सुबह ही इस महान कार्यक्रम को देखने के लिये लोग राजपथ पर इकट्ठा होने लगते है। इसमें तीनों सेनाएँ विजय चौक से अपनी परेड को शुरु करती है जिसमें तरह-तरह अस्त्र-शस्त्रों का भी प्रदर्शन किया जाता है। आर्मी बैंड, एन.सी.सी कैडेट्स और पुलिस बल भी विभिन्न धुनों के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन करते है। राज्यों में भी इस उत्सव को राज्यपाल की मौजूदगी में बेहद शानदार तरीके से मनाया जाता है।
भारत में आजादी के बाद “विविधता में एकता” के अस्तित्व को दिखाने के लिये देश के विभिन्न राज्य भी खास झाँकियों के माध्यम से अपनी संस्कृति, परंपरा और प्रगति को प्रदर्शित करते है। लोगों द्वारा अपनी तरफ का लोक नृत्य प्रस्तुत किया जाता है साथ ही गायन, नृत्य और वाद्य यंत्रों को बजाया जाता है। कार्यक्रम के अंत में तीन रंगों(केसरिया, सफेद, और हरा) के फूलों की बारिश वायु सेना द्वारा की जाती है जो आकाश में राष्ट्रीय झंडे का चिन्ह् प्रदर्शित करता है। शांति को प्रदर्शित करने के लिये कुछ रंग-बिरंगे गुब्बारों को आकाश में छोड़ा जाता है।

गणतंत्र दिवस पर निबंध (400 शब्द) 

हमारी मातृभूमि भारत लंबे समय तक ब्रिटीश शासन की गुलाम रही जिसके दौरान भारतीय लोग ब्रिटीश शासन द्वारा बनाये गये कानूनों को मानने के लिये मजबूर थे, भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा लंबे संघर्ष के बाद अंतत: 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। लगभग ढाई साल बाद भारत ने अपना संविधान लागू किया और खुद को लोकतांत्रिक गणराज्य के रुप में घोषित किया। लगभग 2 साल 11 महीने और 18 दिनों के बाद 26 जनवरी 1950 को हमारी संसद द्वारा भारतीय संविधान को पास किया गया। खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक, गणराज्य घोषित करने के साथ ही भारत के लोगों द्वारा 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाने लगा।
भारत में निवास कर रहे लोगों और विदेश में रह रहे भारतीयों के लिय गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाना सम्मान की बात है। इस दिन की खास महत्वता है और इसमें लोगों द्वारा कई सारे क्रिया-कलापों में भाग लेकर और उसे आयोजित करके पूरे उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है। इसका बार-बार हिस्सा बनने के लिये लोग इस दिन का बहुत उत्सुकता से इंतजार करते है। गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी एक महीन पहले से ही शुरु हो जाती है और इस दौरान सुरक्षा कारणों से इंडिया गेट पर लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी जाती है जिससे किसी तरह की अपराधिक घटना को होने से पहले रोका जा सके। इससे उस दिन वहाँ मौजूद लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो जाती है।
पूरे भारत में इस दिन सभी राज्यों की राजधानीयों और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भी इस उत्सव पर खास प्रबंध किया जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति दवारा झंडा रोहण और राष्ट्रगान के साथ होता है। इसके बाद तीनों सेनाओं द्वारा परेड, राज्यों की झाकियोँ की प्रदर्शनी, पुरस्कार वितरण, मार्च पास्ट आदि क्रियाएँ होती है। और अंत में पूरा वातावरण “जन गण मन गण” से गूँज उठता है।
इस पर्व को मनाने के लिये स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी बेहद उत्साहित रहते है और इसकी तैयारी एक महीने पहले से ही शरु कर देते है। इस दिन विद्यार्थीयों अकादमी में, खेल या शिक्षा के दूसरे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिये पुरस्कार, इनाम, तथा प्रमाण पत्र आदि से सम्मान किया जाता है। पारिवारिक लोग इस दिन अपने दोस्त, परिवार,और बच्चों के साथ सामाजिक स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर मनाते है। सभी सुबह 8 बजे से पहले राजपथ पर होने वाले कार्यक्रम को टी.वी पर देखने के लिये तैयार हो जाते है। इस दिन सभी को ये वादा करना चाहिये कि वो अपने देश के संविधान की सुरक्षा करेंगे, देश की समरसता और शांति को बनाए रखेंगे साथ ही देश के विकास में सहयोग करेंगे।

Republic Day Essay in Hindi 300 Words

इस दिन हमारे देश के प्रधानमंत्री सबसे पहले सुबह सेनाओं के सेनापतियों के साथ अमर जवान ज्योति जाते हैं और वहां पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं| इसके बाद हमारे देश के प्रधानमंत्री इंडिया गेट की और निकलते हैं| राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद भव्य झांकियों का आयोजन किया जाता है| इंडिया गेट से लेकर विजयपथ तक इसे देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है| थल सेना, नौ सेना वायु सेना और अर्धसैनिक बलों की परेड इस समारोह की जान होती है| इसके अतिरिक्त पूरे देश की संस्कृति का अवगत कराते हुए प्राय सभी प्रदेशों की भव्य खूबसूरत झांकियां लोगों का मन मोह लेती है|
इस समारोह में देश के लिए अपनी जान की बाजी लगा देने वाले जवानों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाता है देश के कोने-कोने से किसी विशेष मौके पर अपनी सूझबूझ एवं वीरता का प्रदर्शन करने वाले बहादुर बच्चों को भी इस दिन राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कार दिया जाता है| सबसे पहले स्थल, जल, वायु सेनाओं के जवान अपनी सुंदर वेशभूषाओं में सजे हुए अपने अस्त्र-शस्त्र के साथ राष्ट्रपति को सलामी देते हैं| विभिन्न अत्याधुनिक हथियारों को देख कर जनता का मन देश की सुरक्षा के प्रति आश्वस्त हो जाता है|
परेड में विभिन्न सैनिक बैंडों की धुनें दर्शकों को मंत्र-मुग्ध कर देती है| सभी राज्य की परेड निकलती हैं और वह अपने राज्यों की विशेषताओं को परेड के दौरान दर्शाते हैं| इस दिन बहुत ही सुंदर वातावरण बना रहता है और सब हर्षोउल्लास से खुशियां मनाते हैं| यह दिन भारत के लिए बहुत ही खास दिन होता है| अंत में वायु सेना के जहाज आसमान में कलाबाजियां प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लेते हैं| इस दिन राष्ट्रपति भवन में अनेक राजकीय समारोह आयोजित किए जाते हैं| विदेशी राजनयिक वरिष्ठ सम्मानीय जन वह पदक विजेता जहां एकत्र होते हैं| रात्रि को राष्ट्रपति भवन सचिवालय इंडिया गेट व अन्य राजकीय कार्यालय रंग बिरंगी रोशनी से जगमगा उठते हैं| लाल किले के प्रांगण में कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया जाता है| 

अति लघु निबंध (कक्षा 1,2,3) 

प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को देश भर में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है
क्युकी इसी दिन सन 1950 को देश भर में संविधान लागु किया गया था!
गणतंत्र दिवस एक राष्ट्रीय पर्व है जिसे पूरा भारत वर्ष एक जुट हो कर मनाता है !
इस दिन राजपथ (नई दिल्ली) पर एक विशेष परेड का आयोजन किया जाता है,
जो की राष्ट्रपति भवन, राजपथ से होते हुए इंडिया गेट को जाती है!
गणतंत्र (गण+तंत्र ) का अर्थ है जनता का तंत्र !
जो कि लोकतंत्र की सामान्य परिभाषा भी है!

Republic Day Essay in Hindi 400 Words

स्कूलों में देशभक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है| राष्ट्रीय एकता का यह पर्व सभी धर्मों के लोगों को मिलजुल कर रहने एवं प्रेम भाईचारा का संदेश देता है| हमें देश की शुद्धता अखंडता एवं संप्रभुता बनाए रखनी चाहिए| यह यह नहीं भूलना चाहिए कि हम आज जिस आज़ादी की सांस ले रहे हैं वह वीर जवानों की देन है| सरहद पर जवान सर्दी, गर्मी लू को सहते हुए भी हर पल दुश्मनों पर सिर्फ इसलिए नज़र रखते हैं कि हमारा गणतंत्र सुरक्षित रह सके| हमें भी अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने का संकल्प लेते हुए देश के विकास में हरसंभव योगदान देना चाहिए|
प्रजातंत्र और लोकतंत्र गणतंत्र के समानार्थी शब्द है| प्रजातंत्र शासन प्रणाली के अनेक लाभ हैं| प्रजातंत्र शासन में राज्य की अपेक्षा व्यक्ति को अधिक महत्व दिया जाता है| राज्य व्यक्ति के विकास के लिए पूर्ण अवसर प्रदान कराता है| जिस तरह व्यक्ति और समाज को अलग करके दोनों के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती, ठीक उसी प्रकार प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली में प्रजा और सरकार को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता|
प्रजातंत्र के कई लाभ है, तो इसमें कई प्रकार के हानियाँ भी संभव है| प्रजातंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि जनता शिक्षित हो एवं अपना ही समझती हो| हमें यह समझना होगा कि आज़ादी हमें आसानी से नहीं मिली है| इसके लिए हजारों लोगों ने अपने प्राण त्यागे हैं| आज़ादी मिलने के बाद देश का गणतंत्र बनना हमारे लिए दोहरी खुशी है| इस शुभ दिन का सभी को आदर करना चाहिए गणतंत्र दिवस आज़ादी के शहीदों को याद करने एवं उन्हें श्रद्धांजलि देने में मुख्य भूमिका निभाता है | सभी देशवासी स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु प्राण निछावर करने वाले वीरों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए देश की स्वतंत्रता व अखंडता की रक्षा करने की प्रतिज्ञा कहते हैं|
Note :- Republic Day Essay in Hindi अगर आपको गणतंत्र दिवस पर निबंध  यह अच्छा लगा हो, या आपको इस निबंध के माध्यम से अछि जानकारी मिली को गणतंत्र दिवस के बारे मैं तो आप इसे सभी लोगो के साथ अवश्य शेयर करे ताकि और लोगो तक भी यह जानकारी मिल सके पढ़ने को|

दीर्घ निबंध (Class 4,5,6,7)

गणतंत्र दिवस को 26 जनवरी भी कहा जाता है जो हर साल पूरे भारत में मनाया जाता है. इसी दिन भारत को एक गणतांत्रिक देश घोषित किया गया था साथ ही आजादी के लंबे संघर्ष के बाद भारतीयों को अपनी कानूनी किताब ‘संविधान’ की प्राप्ति हुई थी। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ और इसके ढ़ाई साल बाद ये लोकतांत्रिक गणराज्य के रुप में स्थापित हुआ।
आजादी के बाद एक ड्राफ्टिंग कमेटी को 28 अगस्त 1947 की मीटिंग में भारत के स्थायी संविधान का प्रारुप तैयार करने को कहा गया। 4 नवंबर 1947 को डॉ बी.आर.अंबेडकर की अध्यक्षता में भारतीय संविधान के प्रारुप को सदन में रखा गया।
इसे पूरी तरह तैयार होने में लगभग तीन साल का समय लगा और आखिरकार इंतजार की घड़ी 26 जनवरी 1950 को इसको लागू होने के साथ ही खत्म हुई। साथ ही पूर्णं स्वराज की प्रतिज्ञा का भी सम्मान हुआ।
भारत में गणतंत्र दिवस का दिन राष्ट्रीय अवकाश के रुप में मनाया जाता है जब इस महान दिन का उत्सव लोग अपने-अपने तरीके से मनाते है, जैसे- समाचार देखकर, स्कूल में भाषण के द्वारा या भारत की आजादी से संबंधित किसी प्रतियोगिता में भाग लेकर आदि।
इस दिन भारतीय सरकार द्वारा नई दिल्ली के राजपथ पर बहुत बड़ा कार्यक्रम रखा जाता है, जहाँ झंडारोहड़ और राष्ट्रगान के बाद भारत के राष्ट्रपति के समक्ष इंडिया गेट पर भारतीय सेना द्वारा परेड किया जाता है।

Republic Day Essay (विस्तार से लेख ) 

प्रस्तावना- गणतन्त्र दिवस भी अन्य राष्ट्रीय पर्वों की भाँति बहुत महत्वपूर्ण है। 26 जनवरी 1950 के ही दिन हमारे देश में नए संविधान को लागू किया गया था। यह संविधान बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर के परिश्रम और विवेक से तैयार हुआ था। इस संविधान को लागू कर के हमने अपने राष्ट्र को पूर्ण सत्ता सम्पन्न धर्म निरपेक्ष गणतन्त्र घोषित किया था। इसलिए 26 जनवरी को गणतन्त्र दिवस के रूप में भी जाना जाता है।
26 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व- 26 जनवरी 1930 को रावी नदी के तट पर कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था। पंडित जवाहर लाल नेहरू इस अधिवेशन के अध्यक्ष थे। कांग्रेस ने नेहरू जी की अध्यक्षता मे पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्ति को अपना लक्ष्य घोषित किया था। तब से भारत को पूर्ण स्वतन्त्र कराने के लिए निरन्तर संघर्ष चलता रहा। अन्त में भारत 15 अगस्त को स्वतन्त्र हो गया। 26 जनवरी के महत्व को ध्यान में रखते हुए इसी दिन ही भारत के नए संविधान को लागू किया गया।
26 जनवरी का आयोजन- 26 जनवरी एक राष्ट्रीय पर्व है। इसका आयोजन दिल्ली में विशेष उत्साह और धूम धाम के साथ किया जाता है। इस दिन परेड का भी आयोजन किया जाता है। यह परेड विजय चैंक से प्रारम्भ होती है और लाल किले तक जाती है। इस परेड को देखने के लिए लोग प्रातः काल से ही एकत्र होने शुरू हो जाते हैं। लगभग आठ बजे प्रातः राष्ट्रपति की सवारी विजय चैंक पर पहुँचती है। प्रधानमंत्री उनकी अगवानी करते हें। इसके बाद तीनों सेनाओं के सैनिक राष्ट्रपति महोदय को सलामी देते हैं। सैनिकों के बाद स्कूलों के बच्चों की टोलियाँ अपने कार्यक्रम प्रस्तुत करती हैं। बच्चों की विभिन्न प्रकार की क्रियाओं को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। इसके बाद विभिन्न प्रदेशों और केन्द्र शासित प्रदेशों की आकर्षक झाँकियाँ निकलती हैं। इन झांकियों में राष्ट्र के विकास की झलक मिलती है। विभिन्न प्रान्तों की सांस्कृतिक झलक तथा उपलब्धियों का भी पता चलता है।
विद्यालयों में गणतन्त्र दिवस- विद्यालयों में भी गणतन्त्र दिवस बहुत धूम धाम तथा उत्साह से मनाया जाता है। विद्यालयों में छात्र प्रातः आठ बजे के लगभग इकट्ठे होने लगते हैं। राष्ट्रध्वज के आरोहण के बाद छात्र राष्ट्रध्वज को सलाम देते हैं। गणतन्त्र दिवस के महत्व को दर्षाने वाले गीत तथा अन्य कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाते हैं। इस अवसर पर मिष्टान्न वितरण भी किया जाता है।
प्रान्तों में गणतन्त्र दिवस- विभिन्न राज्यों की राजधानियों में भी गणतन्त्र दिवस बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। कवि सम्मेलन रखे जाते हैं। देश के सभी सरकारी भवनों पर रोशनी की जाती है। राष्ट्रपति भवन पर रोशनी का विशेष कार्यक्रम होता है।
उपसंहार- हमने भारत को त्याग और संघर्ष करके स्वतन्त्र कराया था। इसके लिए हजारों, नौजवानों, बच्चों, माताओं और बहनों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। इसलिए हम सबका कत्र्तव्य है कि हम गणतन्त्र दिवस के अवसर पर प्रण करें कि भारत की स्वतन्त्रता और उसके संविधान की मर्यादा रखने के लिए हम सर्वस्व भी न्योछावर कर देंगे। देश की समृद्धि, एकता और अखंडता के लिए हम तन मन धन से जुट जाएँगे।

गणतंत्र दिवस पर विस्तृत निबंध (भाषण) 

(दोस्तों नीचे दी गयी पंक्तियों को आप भाषण के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं. यहाँ हमने विस्तार से गणतंत्र दिवस के बारे में जानकारी दी है)
हमारे राष्ट्रीय त्योहारों में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) का स्थान स्वाधीनता दिवस (15 अगस्त) के बाद महत्वपूर्ण है। आज ही के दिन हमने अपने राष्ट्र के के विकास के एक विशेष संविधान को तैयार करके इसे कार्य-रूप में लागू करने के लिए सब प्रकार की तैयारी और योजना पूरी की थी। यह संविधान डा. भीमराव अम्बेडकर की अपार बुद्धि और विवेक के द्वारा तैयार हुआ था। इस संविधान को लागू करके हमने अपने राष्ट्र को पूर्ण स्वायत गणतंत्र का स्थान दिया था। इसलिए 26 जनवरी को ‘गणतंत्र दिवस’ कहा जाता है।
26 जनवरी का दिन हमारी स्वाधीनता के लिए एक अत्यन्त महत्व एवं हर्ष का दिन है। 26 जनवरी, 1930 को रावी नदी के तट पर नेहरू जी की अध्यक्षता में पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्ति का प्रस्ताव कांग्रेस अधिवेशन में पास हुआ। संघर्ष चलता रहा। निरीह जनता स्वतंत्रता की बलिवदी पर चढ़ती रही। अंततः शहीदों का खून रंग लाया और देश स्वतंत्र हुआ।
लौह पुरूष सरदार पटेल की योग्यता और साहस ने भारत की सात सौ रियासतों को मिलाकर तिरंगे झण्डे के नीचे ला दिया। 26 जनवरी को रावी तट पर किए गए ऐतिहासिक निर्णय की याद में 26 जनवरी 1950 को अखण्ड भारत का संविधान लागू कर दिया गया। इस दिन भारत को सर्वोच्च सम्पूर्ण प्रभुता गणराज्य घोषित किया गया। राष्ट्रपति को देश का सर्वोच्च शासक माना गया। तभी से 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के रूप में माना जाता है।
26 जनवरी को हम एक महान राष्ट्रीय पर्व के रूप में मानते हैं। राजधानी दिल्ली में यह पर्व विशेष समारोह के साथ मनाया जाता है। विजय चौंक से प्रारम्भ होकर लाल किले तक जाने वाली परेड इस समारोह का मुख्य आकर्षण होती है। इस परेड को देखने के लिए लोग बहुत सवेरे से ही इकट्ठे हो जाते हैं। लगभग प्रातः आठ बजे राष्ट्रपति की सवारी विजय चौंक पर पहुँच जाती है।
प्रधानमंत्री उनकी अगवानी करते हैं। इसके बाद तीनों सेनाओं के सैनिक राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। सैनिकों के बाद स्कूलों के बच्चों की टोलियां आती हैं, जो तरह तरह के आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करती हैं। बच्चों की ये क्रियाएँ दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर देती हैं। इसके बाद विभिन्न प्रदेशों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की आकर्षक झाँकियां निकलती हैं। उनमें राष्ट्र के विकास के प्रमाण चिन्ह विज्ञान, कला, संस्कृति की विभिन्न उपलब्धियाँ दिखाई जाती हैं। पंक्तिबद्ध बैठे हुए दर्शक सामने से गुजरती हुई इन झांकियों को देखकर विशेष गर्व का अनुभव करते हैं।
26 जनवरी के दिन विभिन्न स्थलों पर विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम अपनाए और आयोजित किए जाते हैं। इस देश के प्रायः सभी नागरिक इस महत्वपूर्ण त्योहार का विशेष आनन्द लेने के लिए अनेक प्रकार की कार्यविधियों की स्वतंत्रतापूर्वक अपनाया करते हैं।
स्कूलों के बच्चे अपनी रंग बिरंगी पोशाकों में अपने कौशल दिखाते हुए जलूस में भाग लेते हैं। देश की राजधानी दिल्ली में प्रदर्शित झांकियों में विभिन्न हथियारों, टैंकों तथा प्रक्षेपास्त्रों का प्रदर्शन किया जाता है। राज्यों की प्रगति झांकियों के रूप में दिखाई जाती हैं, जिससे भारत की उन्नति और समृद्धि का अनुभव होता है। ‘विभिन्नता में एकता छिपी है’ की उक्ति से भारत की एकता का ज्ञान होता है।
इस दिन प्रत्येक प्रांत की राजधानी में गणतंत्र दिवस बडी धूम धाम से मनाया जाता है। झांकियों आदि के साथ साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। कवि सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं। देश के सभी सरकारी भवनों पर रोशनी की जाती है। जगह जगह राष्ट्रीय झण्डों को फहराया जाता है। भारतीय गणतंत्र की वर्षगांठ के साथ हमारा कर्त्तव्य है कि हम प्रण करें कि भारत की स्वतंत्रता तथा संविधान की मर्यादा रखने के लिए जीवन बलिदान कर देंगे, परन्तु इस पर आँच नहीं आने देंगे। देश की समृद्धि के लिए हम तन, मन और धन से जायेंगे।
इस प्रकार से हमें गणतंत्र दिवस के विशेष महत्व पर पूरा ध्यान देते हुए इस परम सौभाग्यपूर्ण दिवस को एक संकल्प में लेकर देशोत्थान में लग जाना चाहिए।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

दोस्तों नीचे दिए गए बिन्दुओं को पढ़ कर आप गणतंत्र दिवस पर एक अच्छा भाषण भी तैयार कर सकते हैं. साथ ही साथ गणतंत्र दिवस पर आपकी जानकारी आपको एक अच्छा लेख लिखने में भी मदद करेगी.

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है ?

सन 1929 के दिसंबर में लाहौर में कांग्रेस का अधिवेशन जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमीनियन स्टेट घोषित नहीं करेगी, तो भारत अपने आप को पूर्णतः स्वतंत्र घोषित कर देगा।

26 जनवरी 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और पूर्ण स्वराज्य के लिए एक सक्रिय आंदोलन का आरंभ किया।

२६ जनवरी का महत्व बनाये रखने के लिए सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास हुआ कि 26 जनवरी को भारत गणतंत्र दिवस के रूप में प्रत्येक वर्ष मनाएगा!

साथ ही साथ 26 जनवरी की महत्ता इस बात से भी बढ़ जाती है क्योंकि इसी दिन 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान जो कि विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है ! जिसके अस्तित्व में आने पर भारत वास्तव में एक सम्प्रभु देश बना ! यह दिन उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के लिए सम्मान दर्शाता है! इस दिन हम सब उनके बलिदानो को याद कर के उन्हें भावांजलि देते हैं!

गणतंत्र दिवस पर समारोह 

सर्वप्रथम 26 जनवरी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय ध्वज दिल्ली के लाल किले पर फहराया जाता है और उसके बाद सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गया जाता है! इस अवसर पर हर साल एक परेड इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक आयोजित की जाती है! जिसमें भारतीय सेना के विभिन्न अंग जैसे नौसेना, जलसेना, वायुसेना भाग लेती है! इसी दिन परेड प्रारंभ करते हुए प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति (सैनिकों के लिए एक स्मारक) पर पुष्प माला डाल कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं!

राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ 14 घोड़ों की बग्घी में बैठकर इंडिया गेट पर आते हैं, जहाँ प्रधानमंत्री उनका स्वागत करते हैं। राष्ट्रीय धुन के साथ ध्वजारोहण करते हैं, उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है, हवाई जहाजों द्वारा पुष्पवर्षा की जाती है। आकाश में तिरंगे गुब्बारे और सफेद कबूतर छोड़े जाते हैं।

भारत की अलग अलग राज्यों की संस्कृति, विशेषता, उनके लोक गीत , कला और विशेषता को परेड में झाँकियौं के रूप में दिखाया जाता है इस परेड को पूरे भारत में उसी समय सभी टेलीविज़न और रेडियो पर भी दिखाया जाता है।

26 जनवरी का पावन पर्व आज भी हर दिल में राष्ट्रीय भावना की मशाल को प्रज्वलित कर रहा है। लहराता हुआ तिरंगा रोम-रोम में जोश का संचार कर रहा है, चहुँओर खुशियों की सौगात है। किसी ने सच ही कहा है- “कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर इतिहास है।“ ऐसे ही अनेक देशभक्तों की शहादत का परिणाम है, हमारा गणतान्त्रिक देश भारत। आइये हम सब मिलकर उन सभी अमर बलिदानियों को अपनी भावांजली से नमन करें!


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